Monday, 11 May 2015

न्यारापन / Detachment


अर्थ- न्यारा अर्थात अनासक्त, मोह रहित, आकर्षण से परे .  
देह से न्यारा व्यक्ति (Not attached to body) 

·         स्वयं को शरीर रुपी गाड़ी का ड्राईवर समझेगा. देह में स्वयं को मेहमान समझेगा.
·         बार बार आइना नहीं देखेगा. ब्यूटी पार्लर नहीं जाएगा.
·         पहनावा शालीन व साधारण होगा. तन को ढकने के लिए पहनेगा न की दिखाने के लिए.
·         अपने जाति, धर्म, लिंग (पुरुष,स्त्री), रूप (सुन्दर , कुरूप ), आर्थिक स्थिति, पद, व्यवसाय, आदि के भान में नहीं होगा. उन्हें याद नहीं रखेगा.

नाम - मान - शान से न्यारा व्यक्ति (Not attached to name, respect and fame)

·         अपनी प्राप्तियों उपलब्धियों (धन, डिग्री, पद, पुरस्कार, आदि) का बार बार जिक्र नहीं करेगा.
·         फोटो खिंचवाने को आतुर नहीं होगा. फोटो खिंचवाते समय तरह तरह के पोज़ न बनाना. अखबारों में अपना फोटो ढूंढता नहीं रहेगा. मेरी फोटो कितनी आई, कैसे आई, किसके साथ आई यह चिंता नहीं करेगा.
·         बहुत महंगे और बहुत सारे कपड़े नहीं खरीदेगा. बाकी रहन सहन भी साधारण होगा.
·         स्पेशल अटेंशन व विशेष सम्मान व ध्यान चाहने वाला नहीं होगा. स्पेशल ट्रीटमेंट और खास सुविधाएं नहीं चाहेगा.
·         मंचनशीन की बजाय दिल तख़्त नशीन बनेगा. दर्शकों में बैठ कर भी स्वयं को मंचासीन समझेगा. अपने नाम की उद्घोषणा (अनाउंसमेंट) नहीं चाहेगा.

मेरेपन / मैंपन से न्यारा  व्यक्ति (Not attached to belongings)

मेरा आईडिया सबसे अच्छा, मेरे बच्चे सबसे अच्छे, मेरे रिश्तेदार सबसे अच्छे, मेरा मकान सबसे सुन्दर, मैं औरों से ज्यादा काम करता हूँ, मैं सबसे बुद्धिमान, मैं सबसे ज्यादा दान (धन सहयोग) करता हूँ, इन संकल्पों से मुक्त रहेगा.

मृत्यु के समय अंतिम परीक्षा न्यारेप्न की ही होगी. 

Sunday, 10 May 2015

निश्चिन्त / Carefree


अर्थ – चिंतामुक्त, धन के नुकसान, असफलता और अपमान की चिंता न करना. Easy, relaxed and free from anxiety.

लक्षण

आराम में दिखाई देते हैं. घबराहट से मुक्त होते हैं. एकरस स्थिति में रहते हैं. व्यवहार में ज़्यादा उतार चढ़ाव नहीं आते. चेहरा खुशनुमा होता है. चलते फिरते गुनगुनाते रहते हैं. हँसते हँसाते रहते हैं. मन से हल्के रहते हैं. शांत और सुखी रहते हैं. ऊर्जावान बने रहते हैं. रात को नींद अच्छी आती है. स्वयम को सदा भाग्यवान समझते हैं.

कैसे आए निश्चिंतता ?

·         कम सोचना. जो सोचना वह सकारात्मक सोचना. संदेह या शंकाएं न करना.
·         कोई कार्य कैसे होगा यह चिंता करने की बजाए उसे करने के उपाय ढूंढना.
·         कोई कार्य समय पर कैसे होगा यह चिंता करने की बजाए दिन रात उसे करने में लग जाना, औरों का सहयोग लेना.
·         अपनी आमदनी अनुसार खर्चना. उधार लेने व देने से बचना. कम से कम उधार लेना. जितना चुकाने की क्षमता हो उतना ही उधार करना.
·         ज्यादा इच्छाएँ न रखना व सदा संतुष्ट रहना. त्याग की क्षमता रखना.
·         ज्ञान अर्जित करके व कार्यकुशलता विकसित करके स्वयम को योग्य बनाना.
·         कार्य पूरा रखना. स्वयम अपना काम करना. दूसरों पर निर्भरता न रखना.
·         सही कर्म करते रहना और परिणाम के बारे में पहले से ही न सोचना.
·         जो हो रहा है उसे स्वीकार करते चलना. कुछ गलत हो जाने पर यह विश्लेषण करना की ज़्यादा से ज्यादा कितना नुकसान होगा और उस नुकसान को स्वीकार कर लेना.
·         वर्तमान में जीना.
 याद रखना की जीवन में सभी लोगों को संतुष्ट करना असंभव है.
 ये भी याद रखना कि जीवन के सभी काम परफेक्ट नहीं किये जा सकते. अपनी प्राथमिकताएँ निर्धारित करनी पड़ती हैं की किन कामों को परफेक्ट करना है और किन को कामचलाऊ.
·         सब कुछ ईश्वर का समझ कर सँभालते रहना.
·         स्वयम को ईश्वर की छत्रछाया में समझना. निर्भयता से निश्चिंतता आती है.




पवित्रता / Purity


अर्थ

मन-वचन-कर्म, दृष्टि-वृत्ति-कृति, संकल्प व स्वपन सब में शुद्धता या शुचिता होना.
सभी विकारों (काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार) से पूरी तरह मुक्त होना पवित्रता है.

पवित्र आत्मा के लक्षण
·       
            ईमानदारी (आनेस्टी) – रुपयों की हेरा फेरी न करे, रिश्वत न ले, खाली बैठ कर तनखा न ले.
·         पारदर्शिता– पवित्र व्यक्ति के पास छिपाने कि बातें कम होंगी.
·         निश्छलता– उसके व्यवहार में धोखा व चालाकी नहीं होगी. कथनी करनी समान होगी. मन में होगा वही ज़बान पर होगा.
·         सरलता– घुमा फिराकर बात करने की बजाये स्पष्ट बात करेगी. मन वचन से समान होगी. अर्थात जो
·         चेहरे व चाल चलन में रूहानियत व रोयालिटी होगी.
·         सब के प्रति शुभकामना शुभ भावना, रहम व कल्याण की भावना होगी.
·         सदा दुआएं देने और लेने वाली होती हैं.
·         पवित्र आत्मा सदा संतुष्ट व सर्वस्व त्यागी होगी.

प्राप्तियां
·         
        आत्मा के सातों मूल गुणों की पुनः प्राप्ति होगी. वही सातों गुण जो हर आत्मा ईश्वर के घर से अपने प्रथम जन्म के समय भरपूर मात्रा में ले कर आती है. वे गुण हैं शांति, प्रेम, आनंद, ख़ुशी, पवित्रता, ज्ञान व शक्ति.
·         आत्मा का आभा मण्डल ताकतवर बनेगा (स्ट्रोंग औरा).
·         सर्व गुणों से संपन्न व सोलह कलाओं से सम्पूर्ण हो जाएगी.
·         सब की प्रिय व पूजन योग्य बनेगी
·         हेल्थ-वेल्थ-हैप्पीनेस के हकदार बनेगी.

पवित्रता कैसे बढाएं?

1.      अशरीरी (देह से अलग आत्मा) होने का अभ्यास करने से आत्मा का शुद्धिकरण होता है. संकारों का परिवर्तन होता है.
2.      ईश्वर की गहरी याद में जाने से (आत्मा का परमात्मा से योग) आत्मा पवित्र होती जाती है. बुराइयां स्वतः छूटती जाती हैं.

3.      अपनी किसी भी इंद्री द्वारा अपवित्रता ग्रहण न करने से -

आँखों द्वारा – देह के अभिमान से भरे अखबार, मैगज़ीन, किताबें न पढना, सिनेमा न देखना, वास्तविक जीवन में भी शादी-ब्याह, पार्टी, आदि में ज्यादा देर न रुकना. टीवी के सिर्फ स्वास्थ्य व आध्यात्मिक चैनल देखना. घर में देह अभिमान के चित्रों की बजाए ज्ञान से संबंधित चित्र चार्ट लगाना.
कानों द्वारा – सिर्फ ज्ञान के गीत सुनना, किसी के द्वारा बताई गयी अपवित्रता की बात न सुनना.
मुख द्वारा – अश्लील भाषा गालियाँ , निंदा , अहंकारी , नकारात्मक , भाषा का प्रयोग न करना.
भोजन द्वारा  – गली-बाज़ार के ठेलों पर, रेस्तरां, ढाबे, ब्याह-शादी, पार्टी आदि में खाना न खाना ; अज्ञानी आत्मा के हाथ का बना खाना न खाना ; योगयुक्त होकर बनाना, ईश्वर को भोग लगाना (भोजन को प्रसाद बनाना), ईश्वर की  याद में खाना. लहसुन, प्याज, माँस, मदिरा, व नशीले पदार्थ का सेवन न करना.
स्पर्श द्वारा – अपवित्र शरीरों के स्पर्श से बचना. ज्ञानी व पवित्र आत्माओं का संग करना.

  

आज्ञाकारी / Obedient


अर्थ

आज्ञाकारी होने का अर्थ है. जायज़ सत्ता के आदेशों व निर्देशों का पालन करना जैसे आर्मी में जो कमांड में हो, नौकरी में बॉस, घर में माता पिता, स्कूल कॉलेज में टीचर, राजनीति में शासक व अध्यात्म में ईश्वर के आदेशों का पालन करना. ध्यान रखने योग्य यह है कि किन्ही खास हालत में आदेश अगर नैतिकता के मानदंडों पर खरा न उतरता हो तो उसे न मानना भी उचित होता है.



क्यों ज़रूरी है आज्ञापालन? / आज्ञा पालन करने से फायदे

  • समाज की किसी भी संस्था या संगठन का प्रशासन चलाने के लिए आज्ञापालन आवश्यक होता है. आज्ञापालन करने से व्यवस्था व अनुशासन बने रहते हैं.
  • कार्य सम्पन्न करवाने के लिए आज्ञाएँ दी जाती हैं. कुछ लोग आदेश पाए बिना कुछ भी कार्य नहीं करते. आदेश देने पर ही वह कार्य में लगते हैं. अतः आज्ञाकारी होने से वे कर्मशील बनते हैं.
  • कुछ लोगों को पता नहीं होता की क्या करना चाहिए. उनके पास ज्ञान की कमी होती है. आज्ञापालन करने से वे सही दिशा में बढ़ते हैं.
  • अपने से अनुभवी की आज्ञा का पालन करने से सीखते हैं और अनुभवी बनते हैं.
  • सेवाएँ लेने के लिए भी आज्ञा डी जाती है. अतः आज्ञापालन करने से दुआएं और स्नेह पाते हैं.
  • आज्ञापालन करने से सेफ रहते हैं व संरक्षण पाते हैं क्योंकि अथोरिटी आज्ञा मानने वाले की ज़िम्मेदारी भी लेती है.
  • आज्ञाकारी होने से ईनाम, उन्नति या उच्च पद के अधिकारी बनते हैं. आज्ञापालन करने से सजाओं से भी बचते हैं.
  • आज्ञाकारी बनने से जिसकी आज्ञा का पालन करते हैं उसे सम्मान देते हैं व बदले में सम्मान पाते हैं.
  • आज्ञाकारी बनने से ही मददगार और वफादार कहलाते हैं तथा औरों के लिए उदाहरण बनते हैं.
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साहसी / Courageous


लक्षण

·         साहसी व्यक्ति अज्ञात का सामना करने की हिम्मत रखने वाला होता है. वह कुछ ऐसा भी आज़मा सकता है जो औरों ने पहले न किया हो. वह भय की दिशा में बढ़ता है जहाँ और लोग जाने से कतराते हैं.
·         वह कुछ बड़ा करने के लिए कुछ खोने के लिए तैयार रहता है. उसमे जोखिम उठाने और नुकसान झेलने की क्षमता होती है. वह पराजय या असफलता से नहीं डरता.
·         उसमे उपहास या अपमान सहने की भी क्षमता होती है. लोग क्या कहेंगे इसकी वह परवाह नहीं करता.
·         वह दृढ़ निश्चयी होता है. लोगों के डराने से भी पीछे नहीं हटता. अपने विवेक से काम ले आगे बढ़ता है.
·         धारा के विपरीत जाने का पुरुषार्थ भी वह कर सकता है. विपत्ति से नहीं डरता व विपरीत परिस्थिति में भी शांत रहता है.
·         अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने की हिम्मत रखता है. संघर्ष की ताकत रखता है.
·         दबावों के विरुद्ध भी काम कर सकता है. गलत कार्य या गलत मांग के लिए मना करने से नहीं हिचकता.
·         अति सकारात्मक व अतिआशावादी होने के कारण वह बड़े कदम उठा सकता है. उसे स्वयम पर बहुत विश्वास होता है.
·         बार बार असफल होने पर भी प्रयासों को बंद नहीं करता. मदद न मिलने पर भी आगे बढ़ता रहता है.  

·         मन से सदा युवा होता है. मेहनत में यकीन रखता है. बड़े कार्य को भी छोटा समझता है. 

फायदे

साहसी व्यक्ति को ईश्वर की मदद स्वतः मिलती है. साहसी व्यक्ति बड़े आन्दोलन खड़े करते हैं व बड़े परिवर्तन लाते है. शोषण के खिलाफ बोल पाते हैं. उसे रोक पाते हैं. कुरीतियों को मिटाने के निमित्त बनते हैं. दुर्गम स्थानों पर विजय पाते हैं जैसे पर्वत की चोटियाँ, सागर की गहराइयाँ, नए ग्रह, नए द्वीप, आदि. साहसी व्यक्ति सौभाग्य को आमन्त्रण देते हैं. असाधारण कार्य करने के कारण असाधारण सम्मान पाते हैं. इनका नाम अमर हो जाता है. 

Saturday, 9 May 2015

संतोष / Contentment


संतोषी व्यक्ति संतुष्टि या तृप्ति का अनुभव करता है.

लक्षण

संतुष्ट व्यक्ति सिर्फ शरीर के निर्वाह हेतु कमाएगा. निन्यानवे के फेर में नहीं पड़ेगा. व्यापार को ज्यादा नहीं फैलाएगा. ज्यादा कमाने की बजाए परिवार को समय देगा. लोभ वृत्ति नहीं होगी. गलत तरीकों से धन कमाने के बारे में विचार नहीं करेगा जैसे रिश्वत लेना या धोखाधड़ी करना.
वैराग्य वृत्ति होगी. ऐश्वर्य, वैभव या दिखावे के चक्कर में नहीं पड़ेगा. औरों से प्रतियोगिता नहीं करेगा. खर्च भी कम करेगा. अपनी चादर जितने ही पैर पसारेगा.

संतोष रखने के फायदे

संतुष्ट व्यक्ति शांत, आनंदित व हर्षित दिखाई देगा. इससे वह सुंदर दिखाई देगा व आकर्षण की मूरत बनेगा. वह निश्चिन्त या बेफिक्र दिखेगा और सुख चैन से रहेगा. वह निस्वार्थ हो कर सेवा कर पाएगा. उसके लिए ईश्वर में ध्यान लगन आसान होगा.

संतोष की सोच कैसे बने?

निम्नलिखित बातों को याद रखें तो संतुष्ट रहेंगे.

·         रहिये वैसे जेहि विधि राखे राम.
·         समय से पहले भाग्य से ज्यादा कोई पा न सके.
·         प्रारब्ध से जो मिले उसे ख़ुशी से स्वीकारना चाहिए.
·         जो न मिला उसके लिए रोना अर्थात आत्मा की ताकत खोना.
·         जो हो रहा है वही सही है उसी में कल्याण छिपा है.
·         कर्म  सिद्धांत भी कहता है जो हमने बोया है उसे ही काट रहे हैं.
·         मौजूदा परिस्थिति और सुविधाओं के अनुरूप जितना बेहतर किया जा सकता है करना चाहिए.

·         इच्छाओं व प्राप्तियों का कोई अंत नहीं होता.

अंतर्मुखी / Introvert


·       अन्तर्मुखी लोग अपनी ज्ञानेन्द्रियों का बाहरी विस्तार घटाते हैं. जितना जरूरी हो उतना अर्थात कम बोलते हैं. आसपास के वातावरण में जो उपयोगी है वही जानकारी इकट्ठी करते हैं. आसपास की सभी जानकारी प्राप्त करना उचित नही समझते.
·         चिंतन मनन अधिक करते हैं. अपनी सोच व संवेदनाओं पर ध्यान देते हैं. शारीरिक ताकत बढाने की बजाय मानसिक ताकत बढ़ाने पर ध्यान देते हैं.
·         भीड़ की बजाए एकांत पसंद होते हैं. इन्हें बहुत शोर वाले मनोरंजन की जरूरत नहीं होती. कम किन्तु अच्छे मित्र बनाते हैं. ये पढने लिखने के शौक़ीन होते हैं. किताबों को अपना मित्र बनाते हैं.
·         कम बोलते है. बोलने से पहले सोचते हैं.
·         भेड़चाल में नहीं चलते है जो रास्ता सही व नैतिक प्रतीत होता है उसे चुनते हैं.

फायदे
·         उर्जा का प्रवाह भीतर की तरफ होता है जिससे आत्मिक उर्जा बढती है. उर्जा व्यर्थ जाने की बजाये सकारात्मक कार्यों में लगती है.
·         नये विचार आते हैं नए आविष्कार या खोज कर पाते हैं.
·         स्वयं का विश्लेषण कर अपनी सुधार प्रक्रिया पर ध्यान दे पाते हैं.
·         बाहर से आँखें बंद होकर भीतर की खुल जाती हैं. ज्ञान या तीसरा नेत्र खुल जाता है. आत्मा को वास्तविक ज्ञान प्राप्त होता है. जागृति आती है. अंतर्मुखता आत्मा के भीतर ज्ञान गुण शक्तियां प्रकट होने लगती हैं.
·         जो अंतर्मुखी वही योगी या तपस्वी हो सकता है.
·         मौन रहने से एकाग्रता आती है जिससे विचार शक्ति बढती है. अपने विचारों की संख्या तीव्रता, दिशा और क्वालिटी चैक कर पाते है. इससे  विचारों को नियंत्रित कर पाना सम्भव हो पाता है.

·         विचार ताकतवर बनते हैं जिससे प्रकृतिजीत बनते हैं. प्रकृति भी आत्मा के संकल्पों / विचारों अनुरूप चलने लगती है.